पाप कि प्रक्रिया धिरे - धिरे शुरू होता है -
कुदिष्टी
planing -
लूत और उसकी पत्नी - का पाप
लोभ -
उत्पत्ति 13.10 - तब लूत ने आँख उठाकर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और गमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की वाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
बहुत निचली वस्तु को चुनना -
उपर देखो, निचे नही -
छोटी चीजो से चोरी करते है
संसार के साथ समझौता
उत्पत्ति 13:12-13 - अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया। सदोम के लोग यहोवा की दृष्टि में बड़े दुष्ट और पापी थे।
जब लूत इसको जानता था कि - सदोम के लोग पापी है तो उनको छोड़ देना चाहिए था।
2 तीमुथियुस 2:22 - जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उनके साथ धार्मिकता, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
शत्रु द्वारा पकड़ा गया
उत्पत्ति 14:11-12 - तब वे सदोम और गमोरा के सारे धन और भोजनवस्तुओं को लूट-लाट कर चले गए। और अब्राम का भतीजा लूत, जो सदोम में रहता था; उसको भी धन समेत वे लेकर चले गए।
जब हम पाप मे रहते है या बार बार उसके पास जातें है तो पाप हमें पकड़ लेगा -
सांसारिकता
लूत सांसारिकता मे लिप्त था
(लूत फाटक पर बैठने वाला व्यक्ति था)
उत्पत्ति 19:1 - साँझ को वे दो दूत सदोम के पास आए; और लूत सदोम के फाटक के पास बैठा था। उनको देखकर वह उनसे भेंट करने के लिये उठा; और मुँह के बल झुककर दण्डवत् कर कहा;
नशा करने वाले कि संगती -
उत्पत्ति 19:33 - अतः उन्होंने उसी दिन-रात के समय अपने पिता को दाखमधु पिलाया, तब बड़ी बेटी जाकर अपने पिता के पास लेट गई; पर उसने न जाना, कि वह कब लेटी, और कब उठ गई।
2 पतरस 2:6-7 - और सदोम और गमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्ड दिया, कि उन्हें भस्म करके राख में मिला दिया ताकि वे आनेवाले भक्तिहीन लोगों की शिक्षा के लिये एक दृष्टान्त बनें (यहू. 1:7, उत्प. 19:24) और धर्मी लूत को जो अधर्मियों के अशुद्ध चाल-चलन से बहुत दुःखी था छुटकारा दिया। (उत्प. 19:12-15)
दुर्बलता ( अपराध पूर्ण दोष )
लोभ
समाज के कारण भी लूत पाप मे पड़ जाते है
डर
घमण्ड सबसे बड़ा पाप है -
स्वार्थ -
मूर्ति पूजा
अनाज्ञाकरी
धन का प्रेम ( लोभ )
गैर विश्वासघाती स्त्रिया ( जो नैन से सैन करती है )
व्यभिचार
अधिकार कि महत्वकांक्षा
संसार के प्रति प्रेम
पाप मे गिरने का 7 कारण -
एक व्यक्ति मन के शांत वातावरण को बनाये ना रखने के कारण - ( मन का परमेश्वर मे ना जुड़ना। )
प्रार्थना करने मे असफलता -
बाईबल पढ़ने मे असफलता -
प्रार्थना संगति में ना जाना -
अगर पवित्र आत्मा की बात ना सुनने से -
मसीह का अंगीकार न करने से -
( इसको ना छुपाये कि आप मसीही है ) मत्ती 10: 33
ज्योति मे चलने मे असफल
1 यूहन्ना 1:7 - पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं और उसके पुत्र यीशु मसी
ह का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। (यशा. 2:5)
