आत्मिक युद्ध और
सिंहासनों की लड़ाई
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| Thrones of Spiritual Warfare How Church Overthrows Principalities. |
इफिसियों की पत्री की दृष्टि से बाइबल हमें यह सिखाती है कि हमारा युद्ध मनुष्यों से नहीं है, बल्कि आत्मिक शक्तियों से है।
इफिसियों 6:12 में प्रेरित पौलुस स्पष्ट रूप से कहता है -
“क्योंकि हमारा मल्लयुद्ध( spiritual war) मांस और लहू से नहीं, परन्तु प्रधानताओं, अधिकारों, इस संसार के अन्धकार के हाकिमों और स्वर्गीय स्थानों की दुष्ट आत्माओं से है।”
चार आत्मिक शक्तियाँ है -
यह पद मात्र एक चेतावनी नहीं, बल्कि आत्मिक संरचना का रहस्योद्घाटन है। पौलुस हमें दिखाता है कि अंधकार के राज्य में नेतृत्व चार प्रमुख वर्गों में बटा है -
- प्रधानताएँ (Principalities)
- शक्तियाँ (Powers)
- इस संसार के अंधकार के हाकिम (Rulers of Darkness)
- स्वर्गीय स्थानों की आत्मिक दुष्टताएँ (Spiritual Wickedness in High Places)
ये चार शक्तियाँ शैतान के राज्य की चार भुजाएँ हैं। इन्हें शैतान द्वारा सिंहासन सौंपे गए हैं - जो उनके अधिकार और क्षेत्र को दर्शाते हैं। यही कारण है कि वे प्रभुता, शासन और आत्मिक नियंत्रण रखती हैं।
पौलुस की आत्मिक लड़ाई
जब पौलुस ने कुरिन्थियों को लिखा - “यदि मनुष्यों की रीति पर मैंने इफिसुस में पशुओं से लड़ाई की” (1 कुरिन्थियों 15:32)
उसका संकेत किसी साधारण शारीरिक संघर्ष की ओर नहीं था। इफिसुस एक प्रांत था जो आत्मिक दृष्टि से घोर अंधकार के अधीन था। वहीं पौलुस ने आत्मिक दुष्ट शक्तियों का सामना किया। बाद में उसी इफिसुस की कलीसिया को उसने आत्मिक युद्ध का रहस्य समझाया। इससे स्पष्ट होता है कि पौलुस की लड़ाई मांस और लहू से नहीं, बल्कि सिंहासनों से थी। वह आत्मिक क्षेत्रों में जाकर उन शक्तियों का सामना कर रहा था, जिनका प्रभाव पृथ्वी पर दिखाई देता था।
बलवान को पहले बाँधो
यीशु ने मरकुस 3:27 में कहा -
“कोई मनुष्य किसी बलवान के घर में घुसकर उसका माल नहीं लूट सकता, जब तक पहले वह बलवान को बाँध न ले।” यह आत्मिक सिद्धांत का मूल है - यदि हमें प्रधानताओं का अधिकार और उनका “माल” (सत्ता, पद, प्रभाव) प्राप्त करना है, तो पहले उस बलवान को बांधना होगा जो उस क्षेत्र का आत्मिक अधिपति है।
हमारा युद्ध इसलिए है कि हम उन सिंहासनों को छीन सकें, जिन पर अंधकार की शक्तियाँ बैठी हैं।
चार आत्मिक जीवन केंद्र और उनकी कमजोरी
जैसे मनुष्य के शरीर में जीवन के दो केंद्र होते हैं - हृदय और मस्तिष्क - वैसे ही आत्मिक शक्तियों के भी चार केंद्र हैं:
- मृत्यु – जिससे प्रधानताएँ शक्ति प्राप्त करती हैं।
- शरीर (मांस) – जिससे शक्तियाँ फलती-फूलती हैं।
- मन – जिससे अंधकार के हाकिम शासन करते हैं।
- सृष्टि – जहाँ आत्मिक दुष्टताएँ अपना प्रभाव प्रकट करती हैं।
जब हम अनंत जीवन के प्रकाश में चलते हैं, हम मृत्यु पर विजय पाते हैं।
जब हम पाप, लोभ और व्यभिचार को अस्वीकार करते हैं, हम शरीर की शक्ति तोड़ते हैं।
जब हम अविश्वास और संदेह से मुक्त होते हैं, हम अंधकार के हाकिमों को हराते हैं।
और जब परमेश्वर के पुत्र प्रकट होते हैं, सृष्टि स्वतंत्र होती है।
सिंहासनों का पतन और अंतिम विजय
शैतान के सिंहासन की शक्ति इन चारों सिंहासनों से आती है। जब ये चार सिंहासन गिरेंगे, तो सबसे ऊंचा सिंहासन - जहां महा अजगर बैठा है - स्वतः ही कमजोर हो जाएगा।
यही
आत्मिक युद्ध का लक्ष्य है - सिंहासन पर अधिकार प्राप्त करना। एक ऐसी पीढ़ी उठने को है जो इन चार सिंहासनों को गिराएगी और शैतान के सभी कार्यों को निष्फल करेगी। उसी समय, हमारे प्रभु यीशु मसीह का राज्य पूर्ण रूप से आकाश और पृथ्वी पर स्थापित होगा।
“यही युद्ध है, यही लूट है, यही विजय है - यीशु मसीह के नाम में। आमीन।”
🙏 सिंहासनों की प्रार्थना — आत्मिक विजय के लिए
प्रभु यीशु मसीह, आज हम तेरे नाम में खड़े होते हैं। हम जानते हैं कि हमारा युद्ध मांस और लहू से नहीं, बल्कि प्रधानताओं, शक्तियों, अंधकार के हाकिमों और स्वर्गीय स्थानों की आत्मिक दुष्टताओं से है।
हम प्रार्थना करते हैं:
- यीशु के नाम से हम प्रधानताओं कि शक्ति को बांधते है। हे प्रभु मृत्यु की शक्ति को तोड़, और हमें अनंत जीवन के प्रकाश में चलने की सामर्थ्य दे।
- शक्तियों के सिंहासन उखाड़ दे। शरीर के पापों से हमें मुक्त कर। सुसमाचार की तेज ज्योति से हमें भर दे।
- हे परमेश्वर अंधकार के हाकिमों के अधिकार को दूर करके उन्हे यीशु के नाम से बांधते है । हमारे मन को अविश्वास और संदेह से शुद्ध कर और विश्वास से भर दे
- हे सर्वशक्तिमान यहोवा स्वर्गीय स्थानों की दुष्टताओं को पराजित कर। सृष्टि को तेरे पुत्रों के प्रकटीकरण के लिए तैयार कर -
हम घोषणा करते हैं:
तेरे नाम में ये चार सिंहासन गिरेंगे! शैतान का सबसे ऊँचा सिंहासन भी हिल जाएगा। हम तेरे राज्य के लिए लड़ना सिखा और पवित्र आत्मा कि शक्ति दे। तेरी कलीसिया विजयी हो !
यीशु मसीह के नाम में। आमीन।
Spiritual Warfare and Thrones of Authority - Ephesians 6:12 Revealed
Bible teaches that our battle is not against flesh and blood.
Ephesians 6:12 declares: "For we wrestle not against flesh and blood, but against principalities, against powers, against the rulers of the darkness of this world, against spiritual wickedness in high places."
Four Spiritual Powers
These four powers form the backbone of Satan's kingdom:
- Principalities - Ruling authorities
- Powers - Demonic forces
- Rulers of Darkness - Spiritual governors of this world
- Spiritual Wickedness in High Places - Evil entities in heavenly realms
Satan has assigned thrones to these four powers, giving them authority, rank, and dominion. Remove these thrones, and they lose their power.
Paul's Battle in Ephesus
Paul fought "beasts" in Ephesus (1 Corinthians 15:32), not literal animals but spiritual powers. The same Ephesian church received his revelation about wrestling against principalities. Paul's spiritual rank was filled - he battled in heavenly realms.
Bind the Strong Man First
Jesus said in Mark 3:27 - "No man can enter into a strong man's house and spoil his goods, except he first bind the strong man." To plunder principalities, we must first bind their authority. Our target? Their thrones, ranks, and dominion.
Four Life Centers of Darkness
Like human body has heart and brain, spiritual powers have four life centers:
1. Death - Fuels principalities
2. Flesh -Empowers powers
3. Mind - Strengthens rulers of darkness
4. Creation - Sustains spiritual wickedness
Their weaknesses:
- Walk in eternal life light - Death defeated
- Reject sin, lust - Flesh broken
- Cast out unbelief, doubt - Darkness rulers weakened
- Sons of God revealed - Creation liberated
Thrones Fall, Kingdom Comes
When these four thrones collapse, Satan's highest throne weakens automatically. A generation rises to topple these thrones. Then Christ's kingdom will be established in heavenly places.
"This is the battle, this is the plunder, this is the victory - In Jesus Christ name. Amen."


